रायपुर-नागपुर और झारसुगुड़ा रूट पर चलने वाली ट्रेनों में लगेगा ‘सुरक्षा कवच’

 
रायपुर

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ट्रेनों की सुरक्षा काे लेकर सख्त नजर आ रहा है. नागपुर-रायपुर, बिलासपुर और झारसुगुड़ा के बीच चलने वाली ट्रेनों में सुरक्षा कवच लगाने की जरूरत महसूस की जा रही है. इसके लिए जोन ने रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है. बोर्ड से हरी झंडी मिलते ही ट्रेनों में कवच लगाने का काम शुरू हो जाएगा.

रायपुर रेल मंडल के DCM अवधेश कुमार त्रिवेदी ने कहा कि झारसुगुड़ा से लेकर नागपुर क्षेत्र में चलने वाली ट्रेनों में सुरक्षा कवच लगाने की तैयारी चल रही है. बहुत जल्दी यह लागू हो जाएगा. सुरक्षा कवच एक ही ट्रैक पर यदि दो ट्रेनें आ रही हैं तो उसे अलर्ट करेगा. सेंसर के जरिए ट्रेन के चालक और सह चालक को भी अलर्ट करेगा.

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ये है सुरक्षा कवच की खासियत
कवच सिस्टम सेंसर के माध्यम से एक ही ट्रैक पर यदि दो ट्रेनें आ रही हैं तो उसे अलर्ट करेगा. सेंसर के जरिए ट्रेन के चालक और सह चालक को भी अलर्ट करेगा. साथ ही ट्रेनों की गति पर कवच सिस्टम खुद ही ब्रेक भी लगा देता है. इससे ट्रेन से होने वाले हादसों में कमी आएगी. घने कोहरे, बरसात जैसे मौसम में यदि लोको पायलट ब्रेक लगाने में विफल रहता है तो भी यह प्रणाली स्वचालित रूप से गति को नियंत्रित करने में मदद करती है.

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कवच सुरक्षा तकनीक की विशेषताएं
सिग्नल पासिंग की रोकथाम: खतरे की स्थिति में सिग्नल को गलत तरीके से पार करने से बचाने के लिए प्रणाली सक्रिय होती है।
ड्राइवर मशीन इंटरफेस: लोको पायलट ऑपरेशन कम इंडिकेशन पैनल (एलपीओसीआईपी) में सिग्नल के पहलुओं और मूवमेंट अथॉरिटी की निरंतर निगरानी होती है।
ओवर स्पीडिंग की रोकथाम: यदि ट्रेन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलती है, तो सिस्टम स्वतः ब्रेक लगा देता है।
ऑटोमैटिक सीटी: रेलवे फाटकों के पास पहुंचने पर ट्रेन से स्वचालित रूप से सीटी बजती है, जिससे वाहनों और पैदल यात्रियों को चेतावनी मिलती है।
टकराव की रोकथाम: कवच से लैस दो ट्रेनों के बीच टकराव की संभावना को समाप्त करने के लिए प्रणाली कार्यरत रहती है।
आपातकालीन एसओएस संदेश: किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह तकनीक एसओएस संदेश भेजने की सुविधा देती है।
केंद्रीकृत लाइव निगरानी: नेटवर्क मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से ट्रेन की आवाजाही की लाइव निगरानी की जाती है, जिससे परिचालन की निगरानी और प्रबंधन को आसान बनाया जा सके।

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